Tuesday, 5 May 2015

कुछ दर्द भरी हिन्दी शायरी ...


अपनो को…


अपनो को दूर होते देखा ,
सपनो को चूर होते देखा !
अरे लोग कहते हे फ़िज़ूल कभी रोते नही ,
हमने फूलोँ को भी तन्हाइयोँ मे रोते देखा!

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.